art

दिल का दर्द कुछ ऐसा है जो लिखा जाए तो शायरी बन जाए जो बह जाए तो आंसू कहलाए जो लिख दे वो शायर बन जाए जो बहा दे वो कातिल कहलाए।

art

कहते हैं… लफ्ज़ और आंसू, दोनों दिल से निकले तो नाइंसाफी सिर्फ आंसू क्यूं सहे? अरे जनाब, अगर लफ्जों के साथ नाइंसाफी हो जाए तो  भला उन आंसुओं को इंसाफ कौन दिलाए?