अच्छा लगता है….

अच्छा लगता है ओस से लेस इस घास पर चलना,

अच्छा लगता है उस नरम घास की चादर पर लेट कर आसमां को तकना,

अच्छा लगता है पत्तों पर गिरी हुई ओस की बूँदों से खेलना,

अच्छा लगता है यूँ लेटकर पंछियों की बातें सुनना,

अच्छा लगता है सूरज की पहली किरणों को पत्तों पर गिरते देखना,

अच्छा लगता है सुबह के नीले अासमां में पंछियों को झुंड में उड़ते देखना,

अच्छा तो लगता है यूँ क़ुदरत के आग़ोश में रहना,
लेकिन अफ़सोस शहरों की इस भीड़ ने हमसे यह सब छीन लिया और हमें इन मिट्टी की इमारतों के बीच छोड़ दिया….

Mamta Sehgal


Mamta Sehgal

An educator,a believer and now an author.An ardent devotee of the all eternal Shri Krishna & Bhagavad Gita and propagates that the light is within & can illuminate everything.

2 Comments

Paru Sharma · May 9, 2018 at 9:08 pm

Very nice lines

Mamta Sehgal · May 11, 2018 at 12:15 pm

Thanks Paru…

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