।।आज़ादी।।

 

जिसका शेर सा था हौंसला

जिसकी हाथियों सी थी चाल

मौत भी डरती थी मिलाने को नज़रें जिसके साथ

वो वीर था

वो शेर था

वो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह था

उसके जैसा सूरमा

न किसी माँ ने कभी जनमा

न कभी जनमेगी कोई माँ

ये आज़ादी उससे है

ये देश उससे है

फिर क्यों भूल गये उसकी शहादत को

क्यों करते हो याद सिर्फ़ नेहरू और गाँधी बापू को?

उसकी वीरता को सलाम करो

उसकी शहादत को प्रणाम करो

चढ गया फाँसी जो तुम्हारे लिए हँसते हँसते

उसे भी तुम कभी याद करो

उसे भी तुम कभी याद करो।।


Sadah

Totally unprofessional; Trying to figure out what writing is all about; I am just a name.

4 Comments

रजनी की रचनायें · August 15, 2017 at 12:10 pm

बहुत खूब बहुत ही अच्छा लिखा है। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

    Sadah · August 15, 2017 at 2:14 pm

    धन्यवाद।

shifali · August 19, 2017 at 9:44 pm

Jai hind

FeelPurple · March 24, 2018 at 5:36 am

अच्छा लिखा है।

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