Profile photo of Sakshi Gupta

औरत हूँ औरत ही रहने दो।

औरत हूँ, औरत ही रहने दो।

मजहबी धागों से न बांधो तुम,

पर्दे और हिजाब मे न क़ैद करो तुम,

खुली हवा में साँस मुझको भी लेने दो,

औरत हूँ, औरत ही रहने दो।

 

तोलकर हीरे से सर से पावों न ढको तुम

क़ैद कर साँसों को न इख़्तियार करो तुम ,

खुल कर हँसने की मुझे भी छूट दो,

औरत हूँ, औरत ही रहने दो।

 

पत्नी हूँ सिर्फ तुम्हारे लिए श्रृंगार करूं मैं?

बाहर जाऊं तो नज़रें नीचे और पीछे तुम्हारे चलूं में?

कभी खुद के लिए भी जीने दो,

औरत हूं, औरत ही रहने दो।

 

जज्बातों को मेरे यूँ न हवा में बिखेरो तुम

जिस्म से खेलकर मर्दानगी न साबित करो तुम,

प्यार को मेरे कभी तो सम्मान दो,

औरत हूँ, औरत ही रहने दो।

 

देवी से तोलकर मेरी पूजा मत करो तुम

मर्द हो, बस इसलिए मुझे न ज़लील करो तुम,

इंसानों जैसा ही बस व्यवहार करो,

औरत हूँ, औरत ही रहने दो।

 

इतना तो कर सकते हो न तुम,

इज़्ज़त लेने की बजाय, इज़्ज़त से मुझे रहने दो,

औरत हूँ, बस औरत रहने दो।

-sasha


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Sakshi Gupta

I am a blogger and a writer. I am a connotation of coffee and poetry

4 Comments

#यज्ञ · February 16, 2018 at 12:41 am

अति सुंदर

Anonymous · February 16, 2018 at 9:55 am

Woman’s a woman but a man’s a human… This is the society in which we have lived and are still living. 🙁

bali · February 16, 2018 at 5:37 pm

Bahut khoob..kya baat h..

Meera Kamboh · February 17, 2018 at 10:11 am

Really our society is such. They look at a women as she is a toy to play with. In this 21st century still the mentality of our society is so LS

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