मैं क्या हूँ?

आज हर उस पल से खफा हूँ
जिसने यह एहसास दिलाया कि, “मैं क्या हूँ”?
न वजह न खता
बस खौफनाक शिकार बन गई, “मैं क्या हूँ”?
सच का तालाब लिए, हक का सैलाब लिए,
बस एक ही सवाल है, “मैं क्या हूँ”?
बस ज़ख्मों का हिसाब लिए,
मन में चंद सवाल लिए, “मैं क्या हूँ”?
ठहरे लबों से जवाब की आस लिए,
पड़े शवों से ज़िन्दगी की आस लिए, “मैं क्या हूँ”?
जली तो आग लिए, कटी तो दाग लिए
हर पल एक ही सवाल लिए, “मैं क्या हूँ”?


Chandra

life is not to feel regret n nighter to explain ur self...its just about to prove urself so that finders can reach up to u...no need to go behind d others..

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