“तेरे वादे”

“कभी मैं तुम्हें उस चाँद की चाँदनी में ढूंढने की कोशिश करता हूँ, कभी उस डूबते सूरज की लालिमा में ढूंढने की कोशिश करता हूँ। वहाँ नहीं दिखती हो, तो अपने बगीचे के खुशबूदार फूलों में खोजने लगता हूँ, फिर पास में उड़ती हुई तितलियाँ कानों में आकर कुछ गुनगुनाती हैं। मैं उनकी भाषा को तो नहीं समझ पाता हूँ, लेकिन उनके हाव-भाव देखकर पता चलता है कि वो कह रही हैं “तुम कहीं ना कहीं जरूर हो।”

“मुझे नहीं पता तुम मेरे साथ छुपम-छुपाई का खेल खेल रही हो, या फिर परेशान करने की कोशिश कर रही हो, बस इतना पता है कि तुम मेरे पास हो, मेरे उस दिल के करीब हो जिसकी हर धड़कन को बस तुम्हारा ही इंतजार है।”

“तूम मुझसे कितना भी दूर रहने की कोशिश करो, लेकिन एक न एक दिन वो दूरियां कम ही पड़ जायेंगी और फिर हारकर मेरे ही पास आना पड़ेगा।”

“आखिर तुमने वादा किया था, “सर्द की चाँदनी रातों में गर्म कपड़ों के बिना टहलने का, और रास्ते में ढ़ाबे पर एक ही कुल्हड़ में चाय पीने का। तुमने वादा किया था, हल्की बरसात में साथ में भीगने का। तुमने वादा किया था, शाम में समुद्र के किनारे बैठ कर ढेरों बातें करने का। तुमने वादा किया था, टिमटिमाते तारों वाली रात में साथ में बैठ कर तारे गिनने का।”

“आखिर कब तक मैं तुम्हारे किये गये वादों को अकेला पूरा करता रहूँ? आखिर कब तक? तुम्हारे किये वादों को अकेला पूरा करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं होती, बस अकेलापन सताने लगता है। मुझे लगने लगता है कि आखिर क्यों उसके किये गये वादों को अकेला पूरा करने में लगा हूँ, जबकि उस शख्स को वादे और वादे करने वाले इंसान का भी जरा सा भी ख्याल नहीं।”

“तुम जब कभी वापस आओगी, मैं तुम्हें उसी गली के छोर पर मिलूँगा, जहाँ से तुम रोज निकलती थी, मैं उन्ही चिठ्ठियों को पढ़ता मिलूँगा जो तुमने कभी मेरे लिए लिखी थी। तुम भले ही किसी के साथ वापस आओ, लेकिन मैं हमेशा अकेला ही मिलूँगा।”

©ReemaPrabhat


6 Comments

Aditya · December 1, 2017 at 10:07 am

Impressive ……Mr.Prabhat ……Keep it up

Ravi kumar · December 1, 2017 at 11:28 pm

Gajab yrr. ..heart touching….

Kathuria Ji · December 2, 2017 at 1:20 am

Amazing

Leave a Reply

Your email address will not be published.