रहस्मयी कहानियां: जब मेरे चाचा रात को चुपके से घर से निकलने लगे

उन दिनों मैं बहुत छोटा था। शायद मेरी उम्र 7 साल थी। आज से 20 साल पहले की घटना है। सितंबर-अक्टूबर के दिन थे। धान की फसल काटने का काम चल रहा था। हमारे खेत घर से 3-4 किलोमीटर दूर हैं। दरअशल दादा जी अपनी जवानी के दिनों में ही पुश्तैनी जमीन को छोड़कर इस जगह पर आकर बस गए थे, जहां हम रह रहे थे। तो घर-परिवार के लोग पैदल खेतों तक जाते, वहां पर फसल काटते और ढेर लगाकर रख देते। वहीं पर बड़े से खेत में लगी फसल की रखवाली भी करनी पड़ती। इसकी ड्यूटी चाचा की लगती थी, जो उन दिनों कॉलेज में थे। दिन में वह कॉलेज जाते और रात को उन्हें वहीं पर बने अस्थायी मचान में रुकना होता।

खेत ज्यादा थे और अनाज भी काफी होता था। तीन दिन तक करीब चाचा को रात को वहां रुकना पड़ा। इस दौरान चाचा के व्यवहार में बदलाव सा आ गया। वह खाना कम खाने लगे, हंसते-खेलते रहा करते थे, मगर अचानक गंभीर हो गए थे। किसी से बात कम करते थे और हम बच्चो को अक्सर डांट दिया करते थे। सब लोग बड़े परेशान हुए उनके व्यवहार से। इस बीच 10-15 दिन बीते और देखने को मिला की चाचा दिन ब दिन कमजोर होते जा रहे हैं। 15 दिन के अंदर वह सूखकर आधे रह गए थे। बड़े-बुजुर्गों ने पूछा कि क्या कोई दिक्कत तो नहीं। मगर उन्होंने कहा कि ठीक हूं। डॉक्टर के पास जाने से भी इनकार कर दिया।

एक रात मेरी ताई रात को बाहर निकलीं तो उन्होंने देखा कि चाचा जूते पहनकर तैयार होकर कहीं निकल रहा है। उन दिनों घर में टॉइलट बन गया था, फिर कहीं और जाने का तो सवाल भी नहीं था। मगर ताई जी ने अंदर आकर ताऊ जी को बात बताई। ताऊ ने चाचा के कमरे में जाकर देखा तो वह वाकई वहां नहीं थे। सुबह उनके आने का इंतजार किया और जब वह आए तो पूछा कि कहां गए थे। चाचा ने बोला मॉर्निंग वॉक पर। मगर जब उन्हें बताया कि तुम्हारी भाभी ने तुम्हें तो रात को ही निकलते देखा था, इस पर चाचा ने कोई जवाब नहीं दिया और अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया।

अगली रात ताऊ जी ने मेरे पापा के साथ मिलकर योजना बनाई कि देखें कि ये जाता कहां है। रात को फिर डेढ़ बजे के करीब चाचा अपने कमरे से निकला और जूते पहनकर निकल पड़ा। आगे-आगे चाचा और पीछे-पीछे पापा और ताऊ। चाचा हमारे उन्हीं खेतों की तरफ चल पड़ा, जहां पर रात को वह चौकीदारी किया करता था। उन खेतों से आगे चलकर एक नाला था, चाचा उस तरफ बढ़ चला। पीछे से छिपते-छिपाते हुए ताऊ और पापा भी जा रहा था। उन्होंने देखा कि चाचा नाले में उतर गया। वे लोग आगे गए तो अंधेरे में उन्हें समझ नहीं आया कि चाचा गया कहां नाले में। वे काफी देर वहां बैठकर देखते रहे, मगर कुछ नहीं दिखा। इस बीच सुबह हो गई और वे दोनों खाली हाथ घर की तरफ लौट पड़े। घर पर आकर उन्होंने देखा कि सीढ़ियों के पास चाचा के जूते खुले पड़े हैं। कमरे में जाकर उन्होंने देखा कि चाचा वहां पर सो रहा है। वे हैरान थे कि ये कब लौटा।

परिवार में चर्चा हुई कि कुछ तो गड़बड़ है। पहले शंका थी कि कहीं किसी से चक्कर न चल रहा हो या गलत संगति में पड़कर चोरी-चकारी न करने लगा हो, मगर नाले में जाना हैरान कर रहा था। किसी ने बताया कि कुछ तो चक्कर है, इसपर किसी ने कुछ कर दिया है। रिश्तेदारों में बात हुई तो किसी ने सलाह दी कि दूर के मंदिर वाले बाबा से पूछ ली जाए। बाबा ने पूछ देकर बताया कि उसे किसी चड़ेल (चुड़ैल) ने अपने बस में किया हुआ है और वह इसका फायदा उठा रही है। यह इसीलिए सूख रहा है धीरे-धीरे और ऐसा ही रहा तो महीने घर में मर भी सकता है।

घर वाले चिंता में थे। मेरे पापा को यकीन नहीं हुआ इन बातों पर वह बात करना चाहते थे चाचा से। मगर चाचा मुंह से कोई बात नहीं करता था और कुछ पूछने पर वहां से उठकर चल दिया करता था। इस बीच एक दिन पापा कहीं बाहर गए थे काम से, पीछे से ताऊ और पड़ोस के दो अंकलों ने चाचा को पकड़ा और जबरन बाबा के मंदिर ले गए। बाबा ने वहां झाड़फूंक की, मगर चाचा बोलता रहा कि छोड़ो, मुझे कुछ नहीं हुआ। लास्ट में बाबा ने कहा कि मेरे बस का नहीं, इसे किसी और के पास ले जाओ।

चाचा को वहां से छोड़ा गया, तो चाचा बहुत नाराज हुआ। चाचा ने बोला कि मुझे कुछ नहीं हुआ है और दोबारा ऐसा किया तो घर छोड़ दूंगा। सब परेशान थे। वापस आने पर पापा को पता चला कि ऐसा हुआ है तो वह बहुत नाराज हुए। उन्होंने चाचा से बात की और बोला कि कोई बात नहीं, दोबारा ये लोग ऐसा नहीं करेंगे। तू चल मेरे साथ, कोई टेस्ट वेस्ट करवा लेते हैं कि भूख क्यों नहीं लग रही, क्यों वेट लूज़ हो रहा है। चाचा को बोला पापा ने कि कल सुबह चलेंगे। उस वक्त चाचा ने कुछ नहीं कहा। रात को उनके कमरे का दरवाजा बंद कर दिया था कि वह बाहर न निकले। मगर अगली सुबह लोग उठे तो चाचा के कमरे का दरवाजा खुला था वह वहां था ही नहीं।

सबने उन्हें ढूंढने की कोशिश की तो दोपहर तक पता चला कि वह खेतों में गिरा पड़ा है। पड़ोसियों को वहां पर गिरा नजर आया था। उसी जगह पर, जहां पर रात को पहरेदारी करता था। अब सबको कुछ लगा कि मामला गड़बड़ है। पापा ने भी ज्यादा बचाव करना छोड़ दिया था। इतने में चाचा को एक मंदिर (याद नहीं कौन सा) ले जाया गया, जहां की पुजारिन भूत-प्रेत उतारने में माहिर थी। मंदिरों पर मुझे तो नहीं ले जाते थे, मगर बाद में परिवार वालों से जो पता चला, उसी का जिक्र आपके साथ कर रहा हूं। तो वहां पर उस पुजारिन ने चाचा के ऊपर पानी फेंका और चाचा अजीब तरह से हंसने लगा। दोहरी सी आवाज। मानो पुरुष और स्त्री दोनों हंस रहे हों। पुजारिन ने उससे पूछा कि कौन है तू, क्या चाहता है।

इतने में चाचा ने बोला कि मैं तो मैं ही हूं, कोई नहीं है मेरे ऊपर। पर मुझे हंसी ये आ रही है कि तू ढोंग करती है पुजारिन होने की, तुझे तो पता ही नहीं है कि समस्या क्या है। तू भूत-प्रेत ढूंढ रही है मुझमें और मेरे अंदर कोई भूत नहीं है। और इलाज करना है तो मेरे घरवालों का कर, जिनका दिमाग खराब हो गया है। तू मेरी कोई मदद नहीं कर सकती, अपना और मेरा टाइम वेस्ट न कर।

पुजारिन ने 10 मिनट के लिए मौन साधा और फिर बोली- बेटा, बता तू क्या समस्या है तेरे को। समझ तो मैं गई हूं, मगर तेरे मुंह से सुनना चाहती हूं। ये माता का दरबार है, यहां तेरेको कोई डर नहीं है। चाचा यह सुनकर रोने लगा औऱ बोला मैं नहीं बोल सकता, मेरे को कसम खिलाई है। अगर मैं कुछ बोलूंगा तो मेरे पूरे परिवार को खतरा है। पुजारिन ने फिर बोला कि यहां तुझे कोई खतरा नहीं है और न ही तेरे परिवार को कुछ होगा। तू बोल।

आधे घंटे की ऐसी ही बातचीत के बाद चाचा ने जो बुलाया, उसे सुनकर वहां मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े गए हो गए। चाचा ने बताया-

‘पहली रात मैं पहरेदारी करने गया था। जैसे ही मैं सोया, मुझे मेरे नाम से किसी महिला ने पुकारा। पहले मैंने सोचा कि मेरा भ्रम है। तो मैं सो गया आराम से। रात को कोई समस्या नहीं हुई और मैं घर आ गया सुबह। अगली रात को फिर गया तो फिर मुझे किसी ने मेरे नाम से आवाज दी। मैं इधर-उधर देखा तो मुझे झाड़ियों के पास कोई महिला सी दिखाई दी खड़ी हुई। मैं खड़ा होकर ध्यान से उस तरफ देखता हूआ। कम से कम 30-40 फुट दूर आधे से चांद की चांदनी में वह महिला खड़ी हुई दिखाई दी। मैं उसे देखता रहा गौर से। वह भी इस तरफ देख रही थी। उशने कुछ नहीं कहा बस देख रही थी। चेहरा वगैरह नजर नहीं आ हा ता, मगर ऐसा लग रहा था जैसे उसने कोई पकड़े न पहने हों। मैं करीब डेढ़ मिनट तक ऐसे ही देखता रहा। फिर मुझे ध्यान आया कि पास ही कुल्हाड़ी पड़ी है। मैंने नजर घुमाकर कुल्हाड़ी उठाई और फिर उस दिशा में देखा तो वहां कोई नहीं था। मैं परेशान था कि मुझे भ्रम हुआ था कि मैंने कोई सपना देखा था। वो रात जैसे-तैसे बीती और मुझे सुबह लगा कि रात को कोई सपना ही देखा था।

तीसरी रात और आखिरी रात को मैं अपने साथ रेडियो ले गया था। रात को नींद नहीं आ रही थी पिछली रात की घटना को याद करके। रेडियो मैं जोर से बजा रहा था ताकि कोई आवाज भी लगाए तो मुझे सुनाई न दे। नई बैटरी डाली थी, मगर आधे घंटे बाद ही रात साढ़े 12 बजे रेडियो बजना बंद हो गया। अब मैं होशियार होकर बैठ गया। हाथ में कुल्हाड़ी ले ली और उस तरफ नजर डालने लगा, जहां पिछली रात एक महिला जैसा कुछ दिखा था। अचानक झाड़ियों में हरकत हुई औऱ वहां पर फिर वही महिला आई। और इस बार वो अचानक लगातार बढ़ती हुई मेरे पास आने लगी। मन किया कि कुल्हाड़ी का वार करूं, जोर से चीखूं मगर मैं चिल्ला नहीं पाया। मैं खड़ा रहा। वह महिला पास आती रही। उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था। जैसे ही वह वहां आई थी, ऐसी गंध आ रही थी हवा से जैसे कि मछलियों से आती है या खड्ड की जमी हुई काई से।

उसके बाद उसने मेरे साथ गलत काम किया। मैं चाहकर भी कुछ नहीं कर पाया। और उसने मुझे बोला कि इस बारे में किसी को बताया तो मैं तेरे घर को आग लगा दूंगी और सारे परिवारवालों को मार दूंगी।’

चाचा ने ये बात रोते-रोते बताई। इसके बाद चाचा से पुजारिन ने पूछा कि तू क्यों जाता था बार-बार रात को। चाचा ने बोला कि जी वो रोज घर तक आती है मुझे लेने। मुझे उसकी आवाज सुनाई देती है कानों में और फिर खिड़की से बाहर दिखती है वो। वो आगे-आगे चलती हैौ और मैं उसके पीछे-पीछे। फिर मुझे ले जाती है वो अपने साथ नाल में। दरवाजा बंद किया हो घरवालों ने तो वह भी खुल जाता है। मैं किसी को कुछ बता नहीं पाया क्योंकि मैंने देखा है उसकी ताकत कितनी है। वह हवा में उड़ती हुई जाती है और हवां में उड़ती आती है। पानी से बीच से ले जाकर अंदर उसकी गुफा है, जहां पर उसने बहुत सारा सामान रखा हुआ है।

सांकेतिक तस्वीर।

पुजारिन ने इसके बाद मोरपंखे से कुछ मंत्र फूंककर झाफा मारा और चाचा को एक ताबीज पहनने को दिया औऱ बोला कि जब तक इसे पहनेगा, तुझे कुछ नहीं होगा। वो चुड़ैल तेरा कुछ नहीं कर पाएगी। साथ ही मेरे ताऊ जी को पोटली में कुछ दिया और बोला कि इसे गांव के चारों कोनों में दबा दो। ताऊ जी ने उसी दिन लौटकर वह काम किया और गांव के चार कोनों में वो चीजें दबाईं, जो पुजारिन ने दी थी। चाचा ने ताबीज (जंतर) पहना और बैठे रहे। उस रात को करीब 1 बजे हम सबने गांव से दूर बाहर किसी महिला के चीखने की आवाजें सुनीं। सब घरवाले उठे थे, तो मैंने भी वे अजीब सी आवाजें सुनी थीं। अगली सुबह गांववालों ने भी वे चीखें सुनीं थीं, जैसे महिला जोर-जोर से रो रही हो। उसी रात हमारे धान के कुंदलू (धान की फसल का बनाया गया ढेर) में अपने आप आग लग गई और सारी फसल तबाह हो गई।

यह सिलसिला आने वाली 7 रातों तक चलता रहा। मेरे चाचा की भूख खुल गई थी और नॉर्मल होकर बात करने लगे थे। इतने में पुजारिन के पास फिर जाकर बताया गया कि ऐसे गांव से बाहर आवाजें आती हैं। पुजारिन ने कहा कि दिवाली तक रुक जाओ। दिवाली वाली रात बस ख्याल रखना कि ये (मेरा चाचा) कहीं अकेला न जाए बाहर। दिवाली वाली रात चाचा को घर के सब सदस्यों ने चूल्हे के पास बिठाया हुआ था। अचानक उनके पेट में दर्द शुरू हो गया। इतना दर्द हुआ कि उन्हें अस्पताल ले जाने की नौबत आ गई। उन्हें पड़ोसी की जीप में बिठाकर जैसे ही अस्पताल ले जाने लगे, हमारे घर के छप्पर में अचानक आग लग गई। शुक्र मनाओ कि परिवार वाले घर से बाहर निकलकर आंगन में पहुंचे हुए थे चाचा को अस्पताल ले जाने की वजह से। अचानक छत से आग लगी और पूरा घर आग की चपेट में आ गया। कुछ लोग चाचा को अस्पताल ले गए और पड़ोसी वगैरह आग को बुझाने लग गए।

अस्पताल जाते ही चाचा को खून की उल्टियां हुईं और पता चला कि उन्हें पेट में अल्सर हो गए हैं। उनका लंबा इलाज चला और फिर ठीक हो गए। इस बीच गांव में कभी भी वे आवाजें नहीं सुनाई दीं। घर जला और बहुत सारी चीजें जलीं, मगर ऊपर वाले की कृपा से सबकुछ ठीक हो गया बाद में। परिवार इस हानि से उबर गया और आज संपन्न हालत में है। चाचा एक राष्ट्रीयकृत बैंक में मैनेजर हैं और परिवार के साथ सुखी हैं। हम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ रहे हैं।

पता नहीं वह घटनाक्रम क्या था, मगर बचपन में अपने सामने देखा है तो रोमांचित करता ही है।

अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो लाइक्स ओर कमेन्ट करें।


5 Comments

Gracie M. · November 27, 2017 at 10:37 pm

Hi! Can someone please tell me what language is this? Where can I possibly translate this? Babbel?

    Sadah · November 27, 2017 at 10:59 pm

    This is Hindi language. Currently, we cannot provide you with the exact translation of it, but here is a try using Google Translator. Hope it makes some sense.

    Sadah · November 27, 2017 at 11:00 pm

    In those days I was very young Maybe I was 7 years old. Today is 20 years ago. On September-October was the day. Paddy harvesting was in progress. Our farms are 3-4 kilometers away from home. In the days of his youth, the elderly left the ancestral land and settled at this place where we were living. If the people of the house go to the fields, then harvest and lay them on hold. At the same time, it has to be guarding the crops grown in large fields. It seemed like its duty uncle, who was in college in those days. In the day he would go to college and at night he had to stay in the temporary loft made at the place.

    The fields were high and the grain was also quite large. Three days till the uncle had to stay there at night. During this, the change in uncle’s behavior changed. They used to eat less food, laugh and play, but suddenly became serious. Used to talk to someone and we used to scold kids often. Everyone was upset with their behavior. Meanwhile, 10-15 days passed and see that uncle’s day is getting weak day by day. Within 15 days, he had left half empty. The elderly asked if there was no problem. But he said that he is fine. They also refused to go to the doctor.

    One night when my tai was out on my night, he saw that uncle was dressed up wearing shoes and is going out somewhere. In those days the toilets were made in the house, then there was no question of going anywhere else. But Tai Ji came in and told Tau Ji. Tau went to the uncle’s room and looked, he was not really there. He waited for his arrival in the morning and when he came, he asked where he went. Uncle said at the morning walk. But when he told them that your sister-in-law had seen you coming out at night, uncle did not respond to it and went to his room and closed the door.
    The next night, Tao Ji planned with my father, to see where it goes. At around one and a half in the night, uncle left his room and walked out wearing shoes. Front and back uncle and back-up Papa and Tau Uncle walked towards our same fields, where he used to make a watch at night. There was a cemetery ahead of the fields, the uncle continued to grow in that direction. Tau and Papa were also going hide and seek from behind. They saw that Chacha got into the drain. If they went further then in the dark they did not understand that Uncle went where in the nallah. They stayed there for a long time, but they did not show anything. In the meantime, it was morning and they both returned empty handed to the house. Coming home, they saw that the stairs of the uncle were open to the stairs. Going into the room, they saw that Uncle was sleeping there. They were surprised when they returned.

    The family discussed that something is wrong. The first doubt was that no one was walking around in the gutter or being involved in wrong relation, but was stunned to go to the drain. Someone said that something is different, someone has done something on it. Talking to relatives, someone advised that Baba with a distant temple should be asked. Baba asked by saying that he has done some shadal (witch) in his bus and he is taking advantage of it. This is why it is drying slowly and so on, month may die in the house.

    The house was in concern. My dad was not sure he wanted to talk about these things uncle from uncle But uncle did not talk to the mouth and used to walk up and down on some inquiries. In the meantime, one day the papa went out somewhere, from work, Tau from the back and two neighboring neighbors caught the uncle and forcibly took him to the temple of Baba. Baba screamed there, but uncle continued to speak, leave me, nothing happened to me. In the last, Baba said that not just me, take it to someone else.

    Uncle was released from there, so uncle was very angry. Uncle said that nothing has happened to me and if I do this again, I will leave the house. All were upset. On returning, Papa came to know that this happened so he became very angry. They talked to uncle and said that no matter, they will not do this again. You walk with me, make a Test Waste, why are not we going hungry, why we are losing weight. Father told uncle to go tomorrow morning. At that time Uncle did not say anything. At night the door of his room was closed so that he did not come out. But the next morning people got up and the uncle’s room was open, he was not there.
    Everyone tried to find them, by the afternoon, it was revealed that he had fallen into the fields. Neighbors were found lying there. In the same place, where used to patrol the night. Now everyone felt something was wrong. Papa also gave up more defense. In this, uncle was taken to a temple (which is not remembered), where the priestess specializes in lifting ghosts. I did not take me on the temples, but later I was referring to the family who came to know about it. Then there the priest started throwing water over the uncle and the uncle started to laugh a strange way. Double voice As if both men and women are laughing The priest asked him, who is you, what you want.

    In so many uncles said that I am me, there is no one above me. But I’m laughing at you that you pretend to be a priestess, you do not even know what the problem is. You are looking for a ghost – there is no ghost in me and inside me. And treating my family members, whose mind has been spoiled, is to treat. You can not help me, do not waste your time and my time.

    Poojarin silenced for 10 minutes and then the quote- Son, tell me what is the problem to you I understand, I have gone, but I want to hear from you. This is Mother’s Court, here you do not have any fear. Uncle cried and he started crying and said, ‘I can not speak, I have sworn to me.’ If I say something then my whole family is in danger. The priest again said that there is no threat to you here nor there will be anything to your family. You say

    After half an hour’s conversation, after listening to the uncle who had called him, the hounds of people present there stood. Uncle explained-

    ‘The first night I went to the patrol. As soon as I slept, I called a woman in my name. First I thought that my illusion is. So I slept comfortably There was no problem at night and I came home in the morning. The next night again, then someone gave me voice in my name. When I looked around, I saw some women standing beside the bushes. I stood up and looked carefully at that side. At least 30-40 feet away, the woman appeared standing in the moonlight in the moonlight. I kept looking at her carefully. He was also looking at this side. She said nothing was just watching. Face could not be seen anywhere, but it seemed as though he had not worn clothes or wearing it. I kept watching like this for about half an hour. Then I noticed that there was an ax. I picked up the ax and then looked in that direction, there was no one there. I was worried that I was confused that I had a dream. That night passed, and I felt in the morning that I saw only a dream at night.

    On the third night and last night I took the radio with me. Could not sleep at night, remembering the incident last night. The radio was playing loudly so that if I put a voice, I would not hear it. The new battery was cast, but half an hour later the radio stopped playing at 12:30 a.m. Now I sat up smartly Took an ax in his hand and started looking at that, where last night a woman was showing something like this. Suddenly there was a movement in the bushes and then there the same lady came there. And this time she suddenly started coming to me constantly growing. I thought that I would kill the ax, scream loud but I could not scream. I’m standing. She kept coming to the woman. He was not worn anything. As soon as she came there, such a smell was coming from the air as it comes from the fish or from the muddy grounds of the ravine.
    After that he did wrong work with me. I could not do anything even if I wanted to. And he told me to tell anyone about this, so I will set fire to your house and kill all the family members. ‘

    Uncle said this crying and crying. After this the priest asked the uncle, why did you go to the night again. Uncle said that he comes to the house every day to take me. I hear her voice in the ears and then she looks out of the window. He goes ahead and behind and I follow him Then he takes me in the nail with me. The door is closed and the householder also opens it. I could not tell anyone anything because I have seen how much his strength is. He flies in the air and flies in the air. There is a cave inside the center with water, where he has kept a lot of luggage.

    Symbolic picture.

    After this the priestess blasted some mantras from the peacock and gave it to the uncle and gave it to a talisman and said that till you wear it, nothing will happen to you. That witch will not be able to do anything to you. Along with this, my Tauji gave something in the bottle and said that it is in the four corners of the village. Tau ji returned that day and worked and in the four corners of the village pressed those things which the priest had given. Uncle was sitting and sitting on the talisman (Jantar). At around 1 a.m. that night, we all heard voices of screaming of a woman far away from the village. All the people were raised, so I too had heard those weird voices. The next morning, the villagers too had heard the screams like women are crying loudly. That night, our paddy kundalu (pile made of paddy crop) got its own fire and all the crops were devastated.

    This sequence continues for the next 7 nights. My uncle’s hunger was opened and he started talking about normalcy. In such a situation, the priestess went back and told that there are voices out of such village. The priest said that stay till Diwali. Just remember the night on Diwali that this (my uncle) should not go alone alone. On Diwali night, all the members of the house were locked up near the stove. Suddenly the pain started in his stomach. It was so painful that he was taken to the hospital. As soon as they started taking us to the hospital as a neighbor jeep, there was a sudden fire in the roof of our house. Appreciate the fact that the family had moved out of the house and reached the courtyard because the uncle was taken to the hospital. Suddenly there was a fire from the ceiling and the whole house came under fire. Some people took uncle to the hospital and neighbors and others started to extinguish the fire.

    Uncle went to the hospital and vomited blood and found out that he had become chronic in the stomach. His long treatment went on and then he got cured. In the meantime, those voices were never heard in the village. Burned the house and a lot of things burnt, but with the grace of the above, everything was fine afterwards. The family has recovered from this loss and is in a prosperous state today. Uncle is a nationalized bank manager and is happy with the family. We are moving forward in our life.

    I do not know what that event was, but when I have seen it in my childhood, I am thrilled.

    If you liked my story, then Like or comment.

      Gracie M. · November 27, 2017 at 11:41 pm

      Back to the country I came from we have this kind of beliefs and incidents too.. Although I haven’t experience it personally.. only the old folks telling it.. Fortunately your uncle is doing alright now.. I was a bit concerned while reading the middle of the story that something they will take your uncle..

        Sadah · November 28, 2017 at 8:29 am

        Yes he is.
        And thank you for reading the entire thing.

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